‘छोटी माता’ या चिकन पॉक्स का कारण, लक्षण, उपचार-chicken pox treatment,symptoms,effects

By: Tipsdekho

2018-08

‘छोटी माता’ या चिकन पॉक्स का कारण, लक्षण, उपचार-chicken pox treatment,symptoms,effects 

‘छोटी माता’ या चिकन पॉक्स / Chicken Pox, यह ज्यादातर बच्चों में पाया जानेवाला एक आम संक्रामक रोग हैं। ऐसे तो यह रोग बच्चों में बिना उपचार अपने आप ठीक हो जाता है पर कुछ मामलों में बच्चे की रोग प्रतिकार शक्ति कमजोर होने पर निमोनिया भी हो सकता हैं। Chicken Pox का और एहतियात से जुडी अधिक जानकारी हम आप को बताते हैं –

एक बार किसी व्यक्ति को Chicken Pox होने पर व्यक्ति को इस रोग के लिए प्रतिरोधक शक्ति / Immunity निर्माण हो जाती हैं और यह रोग 99% मामलों में दोबारा नहीं होता हैं। इस बीमारी में शरीर में मसूर के दाने के समान फोड़े-फुंसी होती है इसीलिए आयुर्वेद में इसे लघु मसूरिका नाम दिया गया हैं।

चिकन पॉक्स / Chicken Pox – कारण, लक्षण और उपचार 

Chicken Pox कैसे होता हैं :- Chicken Pox यह एक वायरल संक्रामक रोग हैं जो Herpes Varicella-Zoster Virus से कारण होता हैं। Chicken Pox एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा, थूक, छींकना, म्यूकस, फोड़े-फुंसी से निकले द्रव, कपडे, बिस्तर इत्यादि के संपर्क में आने से फैलता हैं। बच्चों में संक्रमण फैलाने का समय फुंसी / rash आने के 2 दिन पहले से शुरू होकर जब तक फोड़े-फुंसी पूरी तरह सुख नहीं जाते तब तक रहता हैं।
Chicken Pox के लक्षण क्या हैं
Chicken Pox के वायरस के संक्रमण होने के 10 से 21 दिनों बाद बच्चों में इसके लक्षण दिखना शुरू होते हैं। Chicken Pox के लक्षण इस प्रकार हैं :
शरीर पर खुजली के साथ लाल दाग और फोड़े-फुंसी हो जाते हैं। शुरुआत में फुंसी छोटी होती है और फिर उसमे तरल पदार्थ जमा होकर फफोले तैयार हो जाते हैं।
मुंह के अंदर, सिर पर, आँखों के पास और जनेन्द्रिय के ऊपर भी छाले / फुंसी आ सकते हैं।
बुखार
थकान / कमजोरी
मांसपेशी में दर्द
सर्दी, जुखाम, नाक बहना
हल्की खांसी
संक्रमण फेफड़ों में फैलने पर खांसी, सांस लेने में तकलीफ और सिने में दर्द भी होता हैं।
Chicken Pox का उपचार कैसे किया जाता हैं:- ऐसे तो Chicken Pox के अधिकतर मामलों में कोई विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती हैं। नवजात बच्चे, गर्भिणी महिला और कमजोर रोग प्रतिकार शक्ति वाले बच्चों में Chicken Pox के लक्षण पाए जानेपर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
बुखार या बदनदर्द होने पर डॉक्टर की सलाह से पेरासिटामोल की दवा लेना चाहिए। अन्य कोई दर्दनाशक दवा का उपयोग न करे।
अगर खुजली ज्यादा है तो डॉक्टर आपको खुजली कम करने की दवा देते हैं।
अगर Chicken Pox के समय शरीर में कोई अन्य बैक्टीरियल संक्रमण हुआ है तो उसे दूर करने के लिए एंटीबायोटिक दवा दी जाती हैं।
अगर Chicken Pox से पीड़ित व्यक्ति की रोग प्रतिकार शक्ति बेहद कम है या रोगी गर्भिणी है तो डॉक्टर जरुरत पड़ने पर एंटी वायरल दवा देते है जिससे इस वायरस का प्रभाव कम होता है और रोग जल्दी काबू में आता हैं।
बच्चों में खुजली की समस्या अधिक होने पर उन्हें डॉक्टर की सलाह से दवा दे। बच्चों के नाख़ून बढे हुए है तो उन्हें काटे और साफ़ रखे। खुजली करते समय नाख़ून का मैल फोड़े-फुंसी में जाने से संक्रमण होकर फोड़े-फुंसी पकने का खतरा रहता हैं। छोटे बच्चों में हाथों पर हैंड सॉक्स पहना देना चाहिए।
खुजली से राहत देने के लिए उनके नहाने के पानी में हल्का बेकिंग सोडा डालें। बच्चों का कमरा ठंडा रखे और उन्हें टाइट गर्म कपड़ो की जगह ढीले सूती कपडे पहनाए।
खुजली कम करने के लिए त्वचा पर लैक्टो कैलामिन लोशन लगा सकते हैं।
फोड़े-फुंसी में कोई संक्रमण होकर पक जाने पर वहां लगाने के लिए डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक क्रीम का इस्तेमाल करना चाहिए।
नीम की पत्तियों को नहाने के पानी में डुबोकर उस पानी से नहलाने से भी लाभ होता हैं। निम के एंटी वायरल गुण के कारण संक्रमण को अधिक फैलने से रोकने में मदद होती हैं।
अगर बच्चों को गले में दर्द होता है तो गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करने से लाभ होता हैं।
बच्चों में Chicken Pox का प्रभाव कम करने के लिए आप उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर उचित मात्रा में गुडुची की गोली या गुडुची सत्व दूध में मिलाकर बच्चों को दे सकते हैं। इससे बच्चे की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने में मदद होती हैं।
बच्चों के शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए उन्हें पानी, तरल पदार्थ अधिक प्रमाण में देना चाहिए।
बच्चों की पाचन शक्ति कमजोर होने के कारण उन्हें खाने में फल, दूध, खिचड़ी, दलिया जैसे हलके और पोषक आहार देना चाहिए। बच्चों तो चिप्स, पकोड़े, पिज़्ज़ा जैसे फास्टफूड बिलकुल नहीं देना चाहिए।
बच्चों को Chicken Pox होने पर पूरी तरह से ठीक होने तक घर के बाहर खेलने या स्कूल में नहीं भेजना चाहिए। इससे संक्रमण फैलने का खतरा रहता हैं।
घर में अगर कोई गर्भिणी महिला है जिसे पहले कभी Chicken Pox नहीं हुआ है तो उन्होंने Chicken Pox पीड़ित व्यक्ति से दूर रहना चाहिए।
Chicken Pox पीड़ित व्यक्ति के कपडे, बिस्तर, थाली, ग्लास इत्यादि गर्म पानी से धोकर साफ़ करने चाहिए।

Chicken Pox Vaccine के बारे में जानकारी:- Chicken Pox से बचने का यह एक कारगर उपाय हैं। इस वैक्सीन के दो dose लेना होता हैं। Chicken Pox वैक्सीन के दो dose लेने पर आपको इससे 98% तक सुरक्षा प्राप्त हो सकती हैं। Chicken Pox vaccine का dose इस प्रकार हैं :
13 वर्ष से कम आयु के बच्चों में पहला dose / टिका 12 से 15 महीने के आयु में दिया जाता है और दूसरा booster dose 4 से 6 वर्ष के आयु में दिया जाता हैं। दूसरा dose पहले भी दिया जा सकता है पर पहला dose देने के 3 महीने बाद ही दूसरा dose दिया जाता हैं।
13 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति जिन्हे पहले कभी Chicken Pox नहीं हुआ है और पहले कभी Chicken Pox vaccine नहीं दिया है ऐसे व्यक्तिओ में पहला वैक्सीन देने के 28 दिनों बाद दूसरा बूस्टर वैक्सीन दिया जाता हैं।
गर्भिणी महिलाओं को यह वैक्सीन नहीं दिया जाता हैं। प्रसव / Delivery के बाद ही यह वैक्सीन गर्भिणी महिलाओं में दिया जा सकता हैं। यह वैक्सीन महिलाओं में दिए जाने के 1 महीने बाद ही महिला ने गर्भधारण करना चाहिए।
Chicken Pox का वैक्सीन एड्स पीड़ित, कैंसर पीड़ित, जिनकी रोग प्रतिकार शक्ति बेहद कम है या जो लोग किसी वजह से स्टेरॉयड दवा ले रहे है उन्हें नहीं देना चाहिए।
Chicken Pox अगर बचपन में हो जाये तो ठीक है क्योंकि बाद में होने पर यह अधिक पीड़ादायक होता हैं। Chicken Pox होने पर अगर बच्चे को अधिक बुखार आता है या बच्चा ज्यादा कमजोर नजर आता है तो घरेलु नुस्खे आजमाने की जगह तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

 

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