Aids Kaise Hota Hai – ऐड्स कैसे होता है

By: Tipsdekho

2018-07

Aids Kaise Hota Hai – ऐड्स कैसे होता है

AIDS एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी के रूप में जाना जाता है। यह बीमारी अगर किसी इंसान को हो जाये तो उसकी म्रत्यु निश्चित हो जाती है। केवल भारत को लिया जाए तो सालाना तकरीबन 80,000 से ज्यादा लोगो की म्रत्यु AIDS के वजह से होती है। इसलिए इससे बचना है तो यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि एड्स क्या है और होता कैसे है ?

क्या है एड्स 

एड्स यानि कि उपार्जित प्रतिरक्षा नाशक रोग समूह, जिसका अर्थ है कि एड्स मनुष्य जाति मेंस्वाभाविक रूप से शुरू नहीं हुआ बल्कि मनुष्य जाति के अपने ही कुछ कर्मों के कारण उपार्जित हुआ। यह एक संक्रामक रोग है जो कि एच.आई.वी. (ह्यूमनइम्यूनो डेफिशियेन्सी वायरस) नाम के विषाणु के संक्रमण की वजह से होता है। जब यह विषाणु शरीर में प्रवेश कर जाता है तो ब्लड में पहुंच कर वाइट ब्लड सेल्स मेंमिलकर उसके DNA में पहुंच जाता है जहां वह विभाजित होता है और रक्त के सफेद कणों पर आक्रमण करता है। धीरे-धीरे यह सफेद कणों की संख्या बहुत कम करदेता है। उसी कमी या समाप्ति के साथ शरीर की रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता को समाप्त करता है।

hib disease in adults

यह विषाणुशरीर में प्रवेश करने के बाद समाप्त नहीं होता। और इसी स्थिति को एड्स कहा जाता है।

  • शोधकर्ताओं के अनुसार AIDS दो वायरस के कारण होता है, HIV1 और HIV2।
  • HIV1 वायरस दुनिया भर में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला वायरस है और HIV2 वायरस ज्यादातर वेस्ट अफ्रीका में पाया जाता है।
  • यह दोनों वायरस रेट्रोवायरस नामक प्रजाति के हैं जो अपना DNA इंसान के DNA से मिला देते है, और जिंदगी भर उस इंसान के DNA  के साथ रहते हैं।
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव शरीर मे पाया जाने वाला वायरस मनुष्यों में बंदरों की प्रजातियों से आया है क्योंकि बंदरों में पाए जाने वालेHIV वायरस और मानव शरीर मे पाए जाने वाले HIV वायरस में काफी समान्यताएँ है।
  • 1930 से 1940 के बीच पहली बार इंसानों में यह वायरस मिला। जो माना जाता है कि बंदर का मास खाने वाले कुछ अफ्रीकी आदिवासियों में पाया गया था और पूरी दुनिया में  फैल गया।
  • भारत देश AIDS के मरीजों की संख्या के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है।

यह जानना जरूरी है की HIV छूने से नहीं फैलता। यह केवल शरीर के अंदर मौजूद तरल पदार्थ जैसे थूक, खून, और सेक्स के द्वारा निकलने वाला सेमेन से फैलता है। क्योंकि HIV वायरस शरीर के बाहर जीवित नहीं रह सकता तो

HIV  के संक्रमण के कारण 

  1. वजाइनल, ऐनल और ओरल सेक्स
    एचआईवी/एड्स से ग्रसित व्यक्ति के साथ असुरक्षित सेक्स करने से इसके वायरस आपके शरीर मे आ जाते हैं। यह वायरस किसी के शरीर मे चुम्बन द्वारा भी आ सकता है पर इसकी संभावना कम होती है क्योंकि थूक में HIV का वायरस कमज़ोर होता है। और चुंबन  करते समय कम से कम 1-2 लीटर थूक एक्सचेंज हो एक दूसरे का तभी संभव है ठुक द्वारा  HIV/AIDS होना।
  2. माँ द्वारा
    यदि जन्म देते समय माँ में HIV वायरस मौजूद है तो वह वायरस बच्चे के अंदर आसकता है। यदि जन्म देने के बाद किसी कारण से माँ के अंदर HIV का वायरस आ जाता है तो यह बच्चे में स्तनपान के द्वारा भी आ सकता है। सही समय पर सही कदम लेने से यह रोका जा सकता है। सही कदम नहीं उठाने के कारण तकरीबन 30% बच्चे जन्म से ही HIV/AIDS से संक्रमित होते हैं।
  3. इंजेक्शन
    किसी HIV/AIDS के मरीज़ के शरीर मे इस्तेमाल की गई सुई को किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर मे इस्तेमाल करने से HIV/AIDS फैल सकता है।
  4. शल्य चिकित्सा शास्त्र
    शल्य चिकित्सा शास्त्र यानी सर्गिकल इंस्ट्रूमेंट्स जो सर्जरी करने के लिए इस्तेमाल की जाती है अगरHIV AIDSके मरीज़ के शरीर पर इस्तेमाल की गई हो और उसे बिना अच्छे से साफ किये दूसरे के शरीर मे इस्तेमाल किया जाए तो HIV AIDS फैल सकता है।
  5. संक्रमित रक्त
    HIV/AIDS एड्स से ग्रसित व्यक्ति का खून बिना जाँच किए किसी को चढ़ा दिया जाए तो उससे भी HIV/AIDS हो सकता है।
  6. म्यूकस मेम्ब्रेन
    म्यूकस मेम्ब्रेन जो शरीर के आन्तरिक अंगों को घेरे रहती है और सभी कैविटीज की सबसे ऊपरी परत होती है यदि उसमें HIV/AIDS का संक्रमित रक्त लग जाता है तो उस व्यक्ति को  HIV/AIDS हो सकता है। जैसे कि यदि किसी को चोट लगी हो और उस चोट पर किसी व्यक्ति का खून लग जाए जिसे HIV /AIDS हो तो उस खून में मौजूद HIV वायरस उस चोट लगे हुए हिस्से से दूसरे व्यक्ति के शरीर मे प्रवेश कर जाता है।

बताये गए कारणों से HIV /AIDS फैलता जरूर है पर जरूरी नहीं है कि इन वजहों से किसी का खून यकीनन संक्रमित ही हो जाए। यह इसपर भी निर्भर करता है कि HIV वायरस कितना मजबूत है। यदि कमज़ोर HIV वायरस किसी के शरीर मे किसी भी तरीके से चला जाए तो संभव है कि उस व्यक्ति को HIV/AIDS न हो।

बदकिस्मती से दुनिया मे HIV को लेके कई गलतफैमियाँ है इस कारण यह भी जानना जरूरी हो जाता है कि HIV AIDS किन कारणों से नही फैलता।

  • कीड़े मकोड़ो के काटने से
  • किसी HIV AIDS के मरीज के मूत्र और पसीने से
  • शौचालय या स्विमिंग पूल कोन से करने से
  • HIV AIDS के मरीज का टॉवल या कपड़ा इस्तेमाल करने से
  • HIV AIDS के मरीज़ों को छूने से या साथ काम करने से
  • HIV AIDS के मरीज के साथ एक थाली में खाने
  • HIV AIDS के मरीज का किसी के सामने छींकने से या खाँसने से भी HIV AIDS नही फैलता।

Symptoms of Aids – एड्स के लक्षण

बीमारियाँ तो जानलेवा हो ही सकती हैं पर एड्स नाम की बीमारी जान लेकर ही ख़त्महोती है। यह बीमारी जितनी भयावह है इसके फैलने का प्रोसेस उतना ही आसान। ये उन बिमारियों में से है कि पीड़ित अपनी मौत की भीख मांगता है। 

एड्स क्याहै
एड्स का पूरा नाम है ‘एक्वायर्ड इम्यूलनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम’ है और यह बीमारी एच.आई.वी. वायरस से होती है। यह वायरस मनुष्य की प्रतिरोधी क्षमता को कमज़ोर कर देता है।
शरीर का बैक्टीरिया वायरस से मुकाबला करने की क्षमता खोने लगता है। जिससे शरीर बीमारियों की चपेट में आने लगता है। शरीर प्रतिरोधक क्षमता आठ-दस सालों में ही न्यूनतम हो जाती है. इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है. एड्स वायरस को रेट्रोवायरस कहा जाता है.
यह जानलेवा बीमारी तेजी से अपने पांव पसार रही है। एड्स के कारण पिछले तीन दशकों में 25 मिलियन से ज्याादा लोगों की मौत हो गई है। वर्तमान में दुनियाभर में लगभग 34मिलियन से ज्यायदा एचआईवी वायरस से संक्रमित हैं।
एच.आई.वी. पाजी़टिव होने का मतलब है, एड्स वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर गया है, इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको एड्स है। एच.आई.वी. पाजीटिव होने के 6 महीने से 10 साल के बीच में कभी भी एड्स हो सकता है। और एक स्वस्थ व्यक्ति अगर एच.आई.वी. पाजीटिव के संपर्क में आता है, तो वह भी संक्रमित हो सकता है।

लक्षण
एचआईवी के शुरुआती स्टे ज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्यगक्ति को इलाज करवाने में देर हो जाती है। इसलिये जरूरी है की सभी को इसके लक्षणों के बारे में पूरी जानकारी हो।
1. थकान
अगर किसी व्‍यक्ति को पहले से ज्याभदा थकान हो रही हो या हर समय थकान का अहसास होता हो, तो उसे इसे गंभीरता से लेते हुए एचआईवी की जांच करवानी चाहिए।

  1. मांशपेशियों में खिंचाव
    अगर बिना कोई कड़ा शारीरिक काम किए हमेशा आपकी मांसपेशियां तनावग्रस्तन और अकड़ी रहती हैं। तो इसे मामूली न समझें। यह एचआईवी का लक्षण हो सकताहै।
  2. जोड़ों में दर्द और सूजन
    उम्र के साथ-साथ जोड़ों में दर्द व सूजन होना सामान्य  माना जाता है, लेकिन कहीं यह समय से पहले हो जाए, तो इस पर सोचने की जरूरत है। इसे हल्के  में लेने की भूल न करें। यह एचआईवी का इशारा हो सकता है।
  3. सिर दर्द
    अगर आपके सिर में हर समय दर्द रहता हो, यह दर्द अगर सुबह-शाम कम हो जाए और दिन में बढ़ जाए, तो यह एचआईवी का लक्षण हो सकता है।
  4. वजन कम होना
    एचआईवी से ग्रस्त  मरीज का वजन रोजाना कुछ कम होने लगता है। अगर बीते दो महीनों में बिना किसी कोशिश के भी आपका वजन कम हो रहा है, तो आपको अपनी जांच करवानी चाहिए।
  5. त्वचा पर निशान
    इम्यून व रेसिटेंस पावर कम होने के कारण शरीर बीमारियों से आपको बचाने में सक्षम नहीं रह पाता। इसका असर त्वचा की बाहरी सतह पर भी होता है। त्वचा पर लाल रेशेस होना और उनका ठीक न हो पाना भी एड्स का लक्षण है।
  6. गला पकना
    अगर आप पर्याप्ती मात्रा में पानी पीते, तो आपको गला पकने की शिकायत हो सकती है। लेकिन, किसी व्यरक्ति का गला अगर पर्याप्त  मात्रा में पानी पीने के बाद भी पक रहा है, तो आपको इस पर विचार करने की जरूरत है। दरअसल, बिना किसी कारण गले में भयंकर खराश और पकन महसूस हो, तो यह एचआईवी का लक्षण दर्शाता है।
  7. बेवजह तनाव होना
    बिना किसी कारण के तनाव हो, जरा-जरा सी बात पर रोना आये तो यह एचआईवी की ओर इशारा करता है।
  8. सूखी खांसी और मतली आना
    बिना भयंकर खांसी के भी कफ बना रहना। लेकिन कफ में खून न आना। हमेशा मुंह का स्वाऔद बिगड़ा रहना आदि भी एचआईवी के लक्षण हो सकते हैं। इसके साथ ही हर समय मतली आना या फिर खाना खाने के तुरंत बाद उल्टीो होना भी शरीर में एच आई वी के वायरस के संक्रमण का इशारा करते हैं।
  9. जुकाम
    यूं तो जुकाम होना आम बात है लेकिन अगर बार-बार अनुकूल मौसम में भी जुकाम जकड रहा हो तो यह भी एचआईवी होने का लक्षण हो सकता है।
  10. सोते वक्त पसीना आना
    अगर किसी भी तापमान में सोते वक़्त पसीना आता है और घुटन महसूस होती हैं तो यह भी एड्स का लक्षण हो सकता है।

प्रणाली(Immune System) बहुत बुरी तरीके से नष्ट हो चूका है।

एचआईवी एड्स का इलाज क्या है What is the treatment for HIV?

HIV एचआईवी के लिए जिन दवाइयों को Prescribe किया जाता है उन्हें एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी Antiretroviral Therapy (ART) कहा जाता है। ART में कुछ प्रकार के HIV दवाइयों को दिया जाता है जिसे एचआईवी रेजिमेन HIV Regimen कहा जाता है।

ART से HIV का पूरा इलाज तो संभव नहीं है परन्तु नियमित रूप से यह दवाइयां खाते रहने पर कोई भी HIV संक्रमित व्यक्ति लम्बे समय तक स्वस्थ और साधारण जीवन जी सकता है। यह दवाई नियमित रूप से खाने पर इसका फैलने की शक्ति भी कम हो जाती है।

 

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